घनघोर तिमिर के शासन में ये चिराग फिर किसने जलाया

घनघोर तिमिर के शासन में ये चिराग फिर किसने जलाया, कुछ खुशियां बाकी हैं अभी ये सुराग फिर किसने दिलाया। सूरज चढ़ने के बाद भी, सहर यहाँ होती नहीं, पलकें मूंदने के बाद भी,आंखे जहां सोती नहीं, दूसरी दुनिया के लोगों से इनका कोई नाता नहीं, सदियों से इनको देखने वहाँ से कोई आता नहीं। […]

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क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आता!

कभी कभी कुछ पुर्जो को समेट कर, खुद को विचारों की चादर में लपेटकर, सोचता हूँ लिखूं मगर खुद को इस योग्य नहीं पाता, क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आता। कभी सोचता हूँ संसार की बुराइयों पर लिखूं, हर समस्या और समाधान पर अपनी राय रखूँ, लिखना शुरू किया, लिखता गया, लेकिन बुराइयों का अंत […]

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